भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार, 21 जुलाई 2025 को अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे अपने पत्र में स्वास्थ्य कारणों और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने की आवश्यकता का हवाला दिया। इस खबर ने देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, क्योंकि धनखड़ का कार्यकाल अगस्त 2027 तक पूरा होने वाला था।
74 वर्षीय जगदीप धनखड़ ने अपने इस्तीफे में लिखा, “स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने के लिए, मैं भारत के उपराष्ट्रपति के पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूँ।” उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू के अटूट समर्थन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। धनखड़ ने अपने पत्र में कहा, “मुझे भारत के अभूतपूर्व आर्थिक प्रगति और विकास को देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह मेरे लिए सम्मान की बात रही।”
इस्तीफे के पीछे की कहानी
जगदीप धनखड़ का इस्तीफा उस दिन आया जब उन्होंने संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने हाई कोर्ट जज यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव और सदन में एक सीट के नीचे मिले नकदी के मुद्दे को उठाया था। सूत्रों के अनुसार, उनके इस्तीफे के पीछे केंद्र सरकार के साथ कुछ मतभेद भी हो सकते हैं, जिसमें एक विपक्षी प्रस्ताव और कुछ मंत्रियों की अनुपस्थिति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस इस्तीफे को “अप्रत्याशित” बताते हुए कहा कि इसके पीछे “कुछ और गहरे कारण” हो सकते हैं। वहीं, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने धनखड़ के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को याद करते हुए उनके स्वास्थ्य की कामना की।
जगदीप धनखड़ का राजनीतिक सफर
जगदीप धनखड़ का जन्म 18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनू जिले के किठाना गांव में हुआ था। उन्होंने सैनिक स्कूल, चित्तौड़गढ़ से शिक्षा प्राप्त की और राजस्थान विश्वविद्यालय से बीएससी और एलएलबी की डिग्री हासिल की। धनखड़ ने अपने करियर की शुरुआत एक वकील के रूप में की और सुप्रीम कोर्ट में एक प्रमुख अधिवक्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई।
उन्होंने 1989-1991 तक लोकसभा सांसद, 1993-1998 तक राजस्थान विधानसभा के सदस्य, और 1990-1991 में चंद्रशेखर मंत्रालय में संसदीय कार्य राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। 2019 से 2022 तक वे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे, जहां उनका कार्यकाल तृणमूल कांग्रेस के साथ कई विवादों के लिए चर्चा में रहा। 2022 में, उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार के रूप में उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की, जिसमें उन्होंने विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को 528 मतों से हराया।
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स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ
हाल के महीनों में धनखड़ के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएँ सामने आई थीं। मार्च 2025 में, उन्हें सीने में दर्द और असहजता के कारण दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी एंजियोप्लास्टी हुई। इसके अलावा, पिछले महीने नैनीताल विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम के दौरान मंच से उतरते समय वे बेहोश हो गए थे।
अगला उपराष्ट्रपति कौन?
धनखड़ के इस्तीफे के बाद, उपराष्ट्रपति का पद खाली हो गया है, और संविधान के अनुच्छेद 67 के तहत, अगले छह महीनों के भीतर इस पद को भरने के लिए चुनाव कराना होगा। उप सभापति हरिवंश नारायण सिंह तब तक राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन करेंगे। निर्वाचन आयोग जल्द ही नए उपराष्ट्रपति के लिए चुनाव की प्रक्रिया शुरू करेगा, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य मतदान करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धनखड़ के स्वास्थ्य की कामना करते हुए कहा, “जगदीप धनखड़ जी ने विभिन्न क्षमताओं में देश की सेवा की है। उनकी बुद्धिमत्ता और अनुभव से राष्ट्र को बहुत लाभ हुआ है।”
निष्कर्ष (Conclusion)
जगदीप धनखड़ का उपराष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल उनके संवैधानिक मूल्यों, किसानों के मुद्दों, और राष्ट्रीय प्रगति के प्रति समर्पण के लिए जाना जाएगा। उनके अचानक इस्तीफे ने देश में एक नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा और यह बदलाव भारतीय राजनीति को कैसे प्रभावित करेगा।





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